कर 'मीर' उस ज़मीं में और इक ग़ज़ल तो मौज़ूँ — मीर तक़ी मीर

कर 'मीर' उस ज़मीं में और इक ग़ज़ल तो मौज़ूँ है हर्फ़-ज़न क़लम भी अब तब्अ' भी इधर है

“O Meer, in that land, another ghazal is composed, The letter-craft pen, even the rhythm, is now here.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मीर, उस ज़मीन पर एक और ग़ज़ल रची गई है। अक्षर-कला और लय, दोनों अब यहाँ मौजूद हैं।

विस्तार

यह शेर शायर की कला और उसकी रूह की अमरता को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि भले ही मेरा शरीर उस ज़मीन में दफ़न हो जाए, लेकिन मेरी शायरी ज़िंदा रहेगी। शायर कहते हैं कि मेरे हुनर का क़लम और मेरी अपनी आदत (तबअअ')—ये दोनों चीज़ें भी मेरे साथ हैं... हमेशा के लिए! यह एक अद्भुत आत्मविश्वास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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