शोला-अफ़्शाँ अगर ऐसी ही रही आह तो 'मीर'
घर को हम अपने कसो रात जला बैठेंगे
“If the sighs are like the show-of-colors (Shola-Afsan)”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कह रहा है कि अगर ये आहें (शोला-अफ़शाँ) वैसी ही रहीं, तो हम अपने घर को रात भर जलाकर राख कर देंगे।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ इश्क़ की हद नहीं बताता, बल्कि वफ़ा के चरम को दिखाता है। शायर कहते हैं कि अगर मेरी आहें.... अगर मेरे दर्द की आग ऐसी ही जलती रही, तो मैं अपने घर को भी जला दूँगा! यह एक ऐसा समर्पण है, जहाँ प्रेमी अपनी ज़िंदगी को भी उस महबूब के इश्क़ में कुर्बान करने को तैयार है। क्या ख़ूब ये तड़प है!
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