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भीड़ टलती ही नहीं आगे से उस ज़ालिम के
गर्दनें यार किसी रोज़ कटा बैठेंगे

The crowd simply does not disperse from the cruel one's way, Friends, the necks of those oppressors will someday be severed.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

भीड़ अभी भी उस ज़ालिम के आगे से नहीं हटती, दोस्तो, लेकिन उन ज़ालिमों की गर्दनें किसी दिन कटकर गिरेंगी।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी उथल-पुथल को दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि ज़ालिम के आस-पास का माहौल, या उसके रास्ते की भीड़, कभी नहीं हटेगी। यह सिर्फ़ एक बात नहीं है, यह एक चेतावनी है! शायर कहते हैं कि ये ज़ालिम लोग अपनी हठधर्मिता में इतने डूबे हैं कि एक दिन उनका अंत निश्चित है। यह शेर अन्याय के ख़िलाफ़ एक शायराना चुनौती है, जिसमें न्याय की आस और बदले की आग है।

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