चल हम-नशीं कि देखें आवारा 'मीर' को टक — मीर तक़ी मीर

चल हम-नशीं कि देखें आवारा 'मीर' को टक ख़ाना-ख़राब वो भी आज अपने घर रहा है

“Shall we see the wanderer, 'Mir,' at the cage, Even he, who was ruined, stays at his own house today.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

चलो हमनशीं कि देखें आवारा 'मीर' को टक ख़ाना-ख़राब वो भी आज अपने घर रहा है। इसका शाब्दिक अर्थ है कि चलो हम नशीं (मस्तीखोर) देखें आवारा 'मीर' को (अपने) ठिकाने पर, वह भी जो ख़राब (या बर्बाद) था, आज अपने घर में रह रहा है।

विस्तार

यह शेर एक तरह की विडंबना और निराशा को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि चलो हम-नशीं होकर उस आवारा को देखें। लेकिन असली बात यह है कि 'ख़ाना-ख़राब'—जिसकी हालत हमेशा टूटी-फूटी रहती है—वो आज अपने घर में है। यह अचानक आई स्थिरता बताती है कि जीवन की सबसे अनिश्चित चीज़ें भी कभी-कभी सामान्य हो जाती हैं। यह एक गहरा व्यंग्य है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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