ताक़त नहीं है जी में नय अब जिगर रहा है — मीर तक़ी मीर

ताक़त नहीं है जी में नय अब जिगर रहा है फिर दिल सितम-रसीदा इक ज़ुल्म कर रहा है

“My heart has no strength left, no life remains in my chest, Yet this cruel-stricken heart commits a sin of torment.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मेरे जी में अब कोई ताक़त नहीं बची है, फिर भी यह दिल जो सताया हुआ है, एक ज़ुल्म कर रहा है।

विस्तार

यह शेर अंदरूनी संघर्ष की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि उनका जिगर (दिल) अब ताक़त में नहीं रहा। लेकिन जो दिल बार-बार ज़ुल्म सहने का आदी हो जाता है, वह खुद भी एक ज़ुल्म करना शुरू कर देता है। यह उस दर्द को बयां करता है जो बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से आता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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