इस जुनूँ पर 'मीर' कोई भी फिरे है शहर में — मीर तक़ी मीर
“On this madness, 'Mir' says, whoever roams the city, What scheme is there in the path that lies between you and the desert's expanse?”
अर्थ
इस जुनून पर 'मीर' कहते हैं कि शहर में कोई भी घूमे, तो जादा-ए-सहरा से तुझ तक जाने के रास्ते में क्या साज़िश है।
विस्तार
यह शेर उस गहरे और सार्वजनिक इश्क़ की उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि उनका जुनून तो पूरे शहर में दिखाई देता है, कोई भी देख सकता है। लेकिन असली मुश्किल तो कहीं और है—वो मुराद की राह! वो राह जो रेगिस्तान जितनी विशाल और अबूझ है, उसे कैसे खोजा जाए। यह इश्क़ की उस लाचारी को बयां करता है, जहाँ रास्ता भी एक साज़िश जैसा लगता है।
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