बाल खुले वो शब को शायद बिस्तर नाज़ पे सोता था — मीर तक़ी मीर

बाल खुले वो शब को शायद बिस्तर नाज़ पे सोता था आई नसीम-ए-सुब्ह जो ईधर फैला 'अम्बर सारा है

“In the night, the child used to sleep on the bed with open hair, but when the morning breeze spread out, the whole sky was here.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

बाल खुले वो शब को शायद बिस्तर नाज़ पे सोता था, आई नसीम-ए-सुब्ह जो ईधर फैला 'अम्बर सारा है। इसका अर्थ है कि वह रात के समय शायद खुले बाल और बिस्तरे पर सोता था, लेकिन जब सुबह की हवा आई तो पूरा आसमान यहाँ फैल गया।

विस्तार

यह शेर यादों की उस नज़ाकत को बयां करता है, जब रात का आलम था और महबूब बेफिक्र था। शायर कहते हैं कि वो रातें... वो पल जब सब कुछ खुला और खूबसूरत था। लेकिन जैसे ही सुबह की हवा (नसीम-ए-सुब्ह) आती है, सब कुछ बदल जाता है। यह शेर सिखाता है कि खूबसूरती और सुकून... ये दोनों ही पल भर के मेहमान हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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