हो आजिज़ कि जिस्म इस क़दर ज़ोर से
न निकला कभू उहदा-ए-मोर से
“How could this body, so forcefully, / Emerge from the Peacock's glorious plume?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे आजिज़, कि जिस्म इस क़दर ज़ोर से निकला कभू उहदा-ए-मोर से।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के ज़बरदस्त एहसास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि उनके अंदर जो जोश है, जो ताक़त है... वो इतनी ज़ोरदार है कि वो किसी तुलना में नहीं है। उन्होंने इसकी तुलना मोर के पंख से की है, मतलब यह एहसास इतना अनोखा है कि इसकी कोई मिसाल नहीं है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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