सताया 'मीर' ग़म-कश को किन्हों ने — मीर तक़ी मीर
सताया 'मीर' ग़म-कश को किन्हों ने
कि फिर अब अर्श तक जाते हैं नाले
“Who tormented the melancholy soul, 'Mir', That now even the drains lead to the heavens?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
किसने 'मीर' नामक शायर को इतना सताया कि अब तो नाले भी अर्श तक जाते हैं?
विस्तार
यह शेर ग़म के उस स्तर को बयां करता है, जहाँ दर्द की कोई सीमा नहीं होती। शायर पूछ रहे हैं कि किस ने ग़म-कश को इतना सताया कि साधारण नाले भी, जो ज़मीन के नीचे बहते हैं, वो आसमान (अर्श) तक पहुँच गए! यह दर्द का वो आलम है, जो तर्कों से परे होता है। मिर्ज़ा ने इस दर्द को एक नज़्म में पिरोया है।
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