हम से जो 'मीर' उड़ कर अफ़्लाक-ए-चर्ख़ में हैं — मीर तक़ी मीर
“Of those who, like 'Mir', have flown into the realms of ecstasy, Why should I seek companionship in that dust?”
अर्थ
जो लोग 'मीर' की तरह अफ़्लाक-ए-चर्ख़ में उड़ गए हैं, उनमें मैं किस तरह की संगति की तलाश करूँ।
विस्तार
यह शेर एक गहरी तसल्ली और जीवन के सच को बयान करता है। मीर साहब कह रहे हैं कि जो लोग हमसे दूर, आसमानों की ऊँचाइयों में पहुँच गए हैं... उन्हें अपनी यादों या उनके रह जाने की धूल से हमें क्या मतलब? उनका चले जाना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। शायर कहते हैं कि हमें उन चीज़ों को लेकर दुखी नहीं होना चाहिए, जो अब हमारी पहुँच से बाहर हैं।
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