गुल-ओ-बुलबुल बहार में देखा — मीर तक़ी मीर
गुल-ओ-बुलबुल बहार में देखा
एक तुझ को हज़ार में देखा
“In the spring, I saw the rose and the nightingale, But I saw you, even among a thousand.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
गुल-ओ-बुलबुल के साथ बहार में मैंने तुम्हें देखा, लेकिन तुम्हें तो मुझे हज़ार में भी दिखाई दिया।
विस्तार
यह शेर महबूब की सर्वव्यापकता को दर्शाता है। शायर कह रहे हैं कि गुलाब और बुलबुल की बहार में, उन्होंने एक महबूब को देखा। लेकिन यह सिर्फ एक बार नहीं था, बल्कि उन्हें हज़ार बार, हज़ार रूप में देखा। यह एहसास है कि महबूब की याद या उनकी खूबसूरती हर चीज़ में समाई हुई है, हर तरफ मौजूद है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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