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तिरे आज के आने में सुब्ह के मुझ पास हज़ार जाए गई तब-ए-बद-गुमाँ मेरी

Neither today's arrival nor the morning near me, My heart's false suspicions consumed a thousand.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तेरे न आज के आने में सुब्ह के मुझ पास, हज़ार जाए गई तब-ए-बद-गुमाँ मेरी। इसका शाब्दिक अर्थ है कि न आज के आने से और न सुबह के पास होने से, मेरे दिल के झूठे संदेह ने हज़ार (या बहुत अधिक) चीज़ें खर्च कर दी।

विस्तार

यह शेर इंतज़ार और बिछड़ने के दर्द को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि आज आपके न आने मात्र से, मेरी पूरी सुबह बर्बाद हो गई। यह सिर्फ़ आपकी याद का दर्द नहीं है, बल्कि वह बेचैनी है, वह 'बद-गुमाँ' की हालत है, जो आपके न होने पर मेरी रूह को खा जाती है। यह एक ऐसे इश्क़ की बात है जो हर पल, हर लम्हे में ज़िंदा रहता है।

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