अब ज़ोफ़ से ढहता है बेताबी शिताबी की — मीर तक़ी मीर

अब ज़ोफ़ से ढहता है बेताबी शिताबी की उस दिल के तड़पने ने क्या ख़ाना-ख़राबी की

“How has the restlessness, which now collapses with such ease, Caused such a destruction in that heart's yearning?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अब ज़ोफ़ से ढहता है बेताबी शिताबी की, उस दिल के तड़पने ने क्या ख़ाना-ख़राबी की। इसका अर्थ है कि अब बेचैनी और अस्थिरता इतनी आसानी से टूट जाती है कि उस दिल के तड़प ने क्या नुकसान पहुँचाया है।

विस्तार

यह शेर उस बेचैनी और तड़प को बयां करता है जो दिल में बस जाती है। शायर कहते हैं कि बस बेताबी की एक लहर... काफी है पूरी ज़िंदगी को ढहा देने के लिए। लेकिन असली नुक़सान, असली 'ख़ाना-ख़राबी'... वह दिल के तड़पने से होती है। यह बताता है कि इश्क़ का दर्द कितना गहरा होता है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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