सहर पा-ए-गुल बे-ख़ुदी हम को आई — मीर तक़ी मीर

सहर पा-ए-गुल बे-ख़ुदी हम को आई कि उस सुस्त पैमाँ में बू थी कसू की

“The dawn of the rose's fragrance came to me, / That in the languid message, there was the scent of the cage.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

सहर पा-ए-गुल बे-ख़ुदी हम को आई, / कि उस सुस्त पैमाँ में बू थी कसू की। (अर्थात: मुझे गुलाब की सुगंध का सवेरा मिला, कि उस आलस्य भरे संदेश में पिंजरे की महक थी।)

विस्तार

यह शेर निराशा और भ्रम के उस पल को बयान करता है। शायर कहते हैं कि भले ही हमें बे-ख़ुदी (निस्वार्थता) का सवेरा दिखाई दे, लेकिन जब हम गहराई में देखते हैं, तो पाते हैं कि हमारी ज़िंदगी का मूल स्वभाव, एक सुस्त बर्तन की तरह, अभी भी दुनियावी मदहोशी की महक से भरा हुआ है। यह एक गहरा तंज है—कि सच्चा पवित्रता पाना कितना मुश्किल है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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