मर जाओ कोई पर्वा नहीं है — मीर तक़ी मीर

मर जाओ कोई पर्वा नहीं है कितना है मग़रूर अल्लाह अल्लाह

“Die, for nothing matters now, How arrogant is Allah, Allah.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मर जाओ, कोई परवाह नहीं है। कितना है مغرور अल्लाह अल्लाह।

विस्तार

यह शेर जीवन और मृत्यु के रिश्ते को बहुत गहराई से समझाता है। शायर कहते हैं कि मर जाने का कोई डर नहीं है, जो एक तरह का विरक्ति या बेपरवाही दिखाता है। लेकिन दूसरी लाइन, 'कितना है मग़रूर अल्लाह अल्लाह,' एक चुनौती है। यह ईश्वर के दिखाए गए घमंड या अहंकार पर सवाल उठाती है। यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि एक गहरा दार्शनिक बयान है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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