Sukhan AI
निगाह-ए-मस्त के मारे तिरी ख़राब हैं शोख़
न ठोर है न ठिकाना है होशियारों का

By the glance of the intoxicated, my beloved, your beauty is intoxicating; / Neither a dwelling nor a place of rest is for the clever.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मस्ती भरे नज़रों के जादू से मेरी प्रिय, तुम्हारी सुंदरता बहुत मनमोहक है; होशियारों के लिए न कोई ठहराव है और न कोई ठिकाना।

विस्तार

यह शेर एक नशीली नज़र के जादू और उसके असर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब की निगाह का ऐसा असर है कि उसकी हर शरारत, हर अदा... हमें बेबस कर देती है। और जब बात हो होशियारों की, तो शायर बताते हैं कि चाहे आप कितने भी समझदार क्यों न हों, आप इस इश्क़ के आगे कहीं भी अपना ठिकाना नहीं बना सकते। यह इश्क़ की उस ताकत का बयान है जो तर्क से परे है।

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पाठ
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