हज़ार रंग खिले गुल चमन के हैं शाहिद
कि रोज़गार के सर ख़ून है हज़ारों का
“The garden's blossoms display a thousand colors, my friend, But the head of employment bears the blood of thousands.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहता है कि गुलशन में हज़ार रंग खिले हैं, दोस्त, लेकिन रोज़गार के सिर पर हज़ारों का खून है।
विस्तार
मिर्ज़ा के इस शेर में जीवन की सच्चाई का ज़िक्र है। ये 'गुल चमन' जो खिले हैं, वो सिर्फ़ रंग नहीं हैं.... वो एक दिखावा हैं। शायर कहते हैं कि इस चमक-दमक के पीछे एक बहुत ख़तरनाक हक़ीक़त छिपी है— कि रोज़गार के लिए हज़ारों का ख़ून बहाना पड़ता है। ये एक गहरा सामाजिक तंज़ है!
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