मिज़ाज उस वक़्त है इक मतला-ए-ताज़ा पे कुछ माइल
कि बे-फ़िक्र सुख़न बनती नहीं हरगिज़ सुख़न-दाँ को
“The mood is for a fresh opening couplet, a little distant, For a word-maker, carefree verses are never made.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मन अभी एक ताज़े मतले की ओर कुछ दूर है, कि एक शब्द-रचना करने वाले के लिए बेफ़िक्र होकर कभी भी कोई बात नहीं बनती।
विस्तार
यह शेर बताता है कि शायरी सिर्फ़ हुनर नहीं है, बल्कि एक अहसास है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि शायरी के लिए एक ख़ास 'मिज़ाज' चाहिए होता है, जो किसी ताज़े सवेरे जैसा हो। जब तक वो माहौल नहीं होगा, तब तक कोई भी शायर बे-फ़िक्र, दिल से निकले हुए शब्द नहीं बुन सकता। यह कला की उस ज़रूरत को बयान करता है, जो सिर्फ़ वक़्त और एहसास से मिलती है।
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