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पाँव में वो नशा तलब का नहीं
अब तो सरमस्त-ए-ख़्वाब हैं दोनों

In my feet, it is not the intoxication of desire, Now, both of us are intoxicated by dreams.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरे पैरों में वह नशा किसी चाहत का नहीं, अब तो हम दोनों ख़्वाबों के नशे में हैं।

विस्तार

यह शेर एक गहरे बदलाव को बयां करता है। शायर कहते हैं कि अब नशा किसी शारीरिक चाहत या तलब का नहीं रहा। अब तो दोनों ही लोग ख्वाबों में मदहोश हैं। यह उस अवस्था का वर्णन है, जब इंसान हकीकत से दूर होकर, सिर्फ कल्पना और सपनों की दुनिया में खो जाता है।

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