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आगे दरिया थे दीदा-ए-तर 'मीर' अब जो देखो सराब हैं दोनों

Where before there was the clear river, O Meer, / Now both appear as mere mirages.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

पहले जहाँ साफ़ नदी थी, मिर्ज़ा, अब जो भी दिखाई दे वह केवल भ्रम या मृगतृष्णा है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी उदासी और मोहभंग की बात करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी में एक समय था जब सब कुछ इतना साफ और सच्चा था, जैसे सामने बहती नदियाँ हों। लेकिन वक्त ने क्या किया! अब जो कुछ भी हमें दिखाई देता है—ये रिश्ते, ये वादे, ये खुशियाँ—ये सब सिर्फ़ एक धोखा है, एक मृगतृष्णा (mirage)। यह एहसास कि जो कल सच था, आज वो बस एक भ्रम है, बहुत दर्दनाक होता है।

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