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क्यूँकर के रहे शर्म मिरी शहर में जब आह
नामूस कहाँ उतरें जो दरिया पे इज़ारें

Why should I be ashamed in my own city, when sighs The honor that cannot descend upon the river's edge?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जब आहें मेरे शहर में शर्म महसूस करती हैं, तो यह कैसा व्यवहार है, जबकि सम्मान (नामूस) तो नदी के किनारे भी उतर नहीं सकता।

विस्तार

यह शेर इज्ज़त और नामूस के खो जाने का दर्द बयां करता है। शायर पूछते हैं कि मेरी शर्म मेरे शहर में क्यों रह गई, जब... नामूस तो कहाँ उतरेगा, अगर इज़ारें ही दरिया पर हैं? इसका मतलब है कि जब आपका मान-सम्मान सार्वजनिक रूप से बिखर जाता है, तो उसे वापस पाना लगभग नामुमकिन होता है। यह एक गहरे भावनात्मक नुकसान को दर्शाता है, जो सिर्फ़ कपड़ों के बह जाने से कहीं ज़्यादा है।

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