रखा कर हाथ दिल पर आह करते
नहीं रहता चराग़ ऐसी पवन में
“Holding the hand upon the heart, sighing,”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल पर हाथ रखकर आहें भरते हुए, एक दीपक ऐसी हवा में नहीं रह सकता।
विस्तार
यह शेर दिल की नाज़ुक हस्ती को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति हाथ दिल पर रखकर आहें भरता है, तो वो दर्द इतना गहरा होता है कि उस माहौल में कोई भी चराग़ (रोशनी) टिक नहीं सकता। यह हमारी भावनाओं की कमज़ोरी को दर्शाता है; एक गहरी आह भी हमारे सुकून की लौ को बुझा सकती है।
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