फाड़ा हज़ार जा से गरेबान-ए-सब्र-ए-'मीर'
क्या कह गई नसीम-ए-सहर गुल के कान में
“From the curtain of a thousand tears, O Meer, the abode of patience, What did the morning breeze whisper into the ear of the flower?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हज़ार आँसुओं के पर्दे से, ऐ मीर, सब्र के ठिकाने, क्या कह गई सुबह की हवा फूल के कान में।
विस्तार
यह शेर धैर्य की नाजुकता और दिल को बदलने वाली रहस्यमयी बातों पर बात करता है। पहली लाइन में शायर मिर्ज़ा मीर अपनी हिम्मत का ज़िक्र कर रहे हैं, मानो कह रहे हों कि मेरा सब्र हज़ार बार तोड़ा गया है। और दूसरी लाइन... यह सवाल करती है कि सुबह की हवा ने फूल के कान में क्या फुसफुसाया होगा। यह दर्द और कोमल प्रेरणा के बीच एक अद्भुत तालमेल है।
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