'मीर' हर-यक मौज में है ज़ुल्फ़ ही का सा दिमाग़
जब से वो दरिया पे आ कर बाल अपने धो गया
“In every wave, the mind is like tresses of hair, Since she washed her locks upon the river's flair.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहता है कि जब से उसने नदी पर अपने बाल धोए, तब से उसका दिमाग़ हर लहर में ज़ुल्फ़ के बालों जैसा हो गया है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ एक नज़्म नहीं है, बल्कि एक एहसास है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि महबूब की याद.... हर लहर में समाई हुई है। यह याद इसलिए गहरी है, क्योंकि उसने नदी में अपने बाल धोए थे। यह बाल धोना महज़ एक क्रिया नहीं थी, यह एक पल था.... एक ऐसा पल जिसने शायर की ज़िन्दगी को हमेशा के लिए बदल दिया। यह दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी घटना.... जीवन भर की याद बन जाती है!
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