उस के कूचे से जो उठ अहल-ए-वफ़ा जाते हैं — मीर तक़ी मीर

उस के कूचे से जो उठ अहल-ए-वफ़ा जाते हैं ता-नज़र काम करे रू-ब-क़फ़ा जाते हैं

“From whose lane the loyal hearts depart, And the lovers’ glances leave the face's art.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जिसके मोहल्ले से वफादार लोग जाते हैं, और जिसकी नज़र से महबूब का चेहरा रू-ब-क़फ़ा हो जाता है।

विस्तार

यह शेर दिल की एक बहुत गहरी उलझन को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि जब वफ़ा के लोग उस महबूब की गली से दूर जाते हैं, तो उन्हें क्या चीज़ मजबूर करती है कि वे जा रहे हैं? न सिर्फ़ नज़ारा, बल्कि वह नज़ारा ही, वह नज़रों का असर है जो उन्हें बार-बार खींचता है। यह विरह और यादों के दर्द को दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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