अब किस किस अपनी ख़्वाहिश-ए-मुर्दा को रोइए
थीं हम को इस से सैंकड़ों उम्मीदवारियाँ
“Now, to whom should we weep for the desire of the dead? There were hundreds of candidates for us.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अब अपनी किस ख़्वाहिश-ए-मुर्दा के लिए रोना है, जब हमें सैकड़ों उम्मीदवारियाँ मिलीं।
विस्तार
यह शेर उम्मीदों के बोझ को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि मृत इच्छाओं पर रोना बेकार है। क्यों? क्योंकि ज़िंदा दिल में खुद ही सैंकड़ों उम्मीदें और आकांक्षाएं भरी पड़ी हैं। यह जीवन की अपेक्षाओं की अतिशयता पर एक गहरा बयान है, जो बीते हुए पर दुःख मनाने का कोई मौका नहीं छोड़ती।
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