बैठा तो बोरिए के तईं सर पे रख के 'मीर'
सफ़ किस अदब से हम फ़ुक़रा की उठा गया
“When I sat, placing the boree on my head, 'Mir', With what grace did you lift the banner of the wandering?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जब मैं बोरिए को सिर पर रखकर बैठा, तो शायर ने कहा कि आपने किस अदब से फ़ुक़रा का बैनर उठा लिया।
विस्तार
यह शेर जीवन के बोझ और उससे निपटने की कला पर बात करता है। शायर कहते हैं कि जब वह बैठे, तो अपने सारे गमों, अपनी यादों को सिर पर रख लिया। और फिर पूछते हैं—कि किस नज़ाकत से उन्होंने इस बोझ को उठा दिया? यह एक गहरा सवाल है। यह बताता है कि ज़िंदगी का भार कितना भी भारी क्यों न हो, उसे संभाल लेने की कला, एक अजब सी सहजता होती है।
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