क्या ए'तिबार याँ का फिर उस को ख़्वार देखा — मीर तक़ी मीर
क्या ए'तिबार याँ का फिर उस को ख़्वार देखा
जिस ने जहाँ में आ कर कुछ ए'तिबार पाया
“What is the worth of a transient moment, or a fleeting glance, For one who has found some permanence in this world?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
किसी क्षणभंगुर या क्षणिक पल का क्या मोल, उस व्यक्ति के लिए जिसने इस संसार में कुछ स्थायी पाया हो।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के दर्द और निराशा को बयां करता है। शायर पूछते हैं कि क्या उन्होंने कभी किसी का भरोसा खोते देखा है? उस इंसान का, जिसने इस दुनिया में अपना वजूद और अपना भरोसा बनाया था। यह अहसास बहुत गहरा है कि कैसे वक़्त और हालात के साथ, सबसे मज़बूत रिश्ते भी बिखर जाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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