मानिंद-ए-शम्मा-मजलिस शब अश्क-बार पाया — मीर तक़ी मीर

मानिंद-ए-शम्मा-मजलिस शब अश्क-बार पाया अल-क़िस्सा 'मीर' को हम बे-इख़्तियार पाया

“At the gathering, the brilliant lamp of the eyes, tears were found, O Meer, We found the tale, O Meer, without any choice.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर महफ़िल में, आँखों के दीये की तरह, आँसू पाए गए। ऐ मीर, हमने कहानी बिना किसी इच्छा के पा ली।

विस्तार

यह शेर उस एहसास को बयां करता है जो हमारी मर्ज़ी से बाहर होता है। शायर कहते हैं कि एक महफ़िल की रात में, आँसुओं की बहार में, उन्हें अपने ही दर्द का नज़ारा मिला। और दूसरी लाइन बहुत गहरी है— 'हमने 'मीर' की कहानी बिना किसी इख़्तियार के पा ली।' इसका मतलब है कि उनकी शायरी, उनका दर्द, उनका वजूद... सब कुछ किस्मत का लिखा हुआ था, जो उन्हें बस यूँ ही मिल गया!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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