रोती है शम्अ' इतना हर शब कि कुछ न पूछो — मीर तक़ी मीर

रोती है शम्अ' इतना हर शब कि कुछ न पूछो मैं सोज़-ए-दिल को अपने मज्लिस में क्यूँ कहा था

“The lamp cries out every night, so do not ask me how much; Why did I mention the sorrow of my heart in my gathering?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शमा हर रात इतनी रोती है कि पूछो मत, मैंने अपने जमावड़े में दिल का दर्द क्यों बताया।

विस्तार

यह शेर दिल की नज़ाकत और अकेलेपन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि शमा का रोना हर रात इतना है कि पूछो मत। और फिर वह खुद से सवाल करते हैं कि उन्होंने अपने दिल का दर्द अपनी महफ़िल में क्यों ज़ाहिर किया। यह उस दर्द की बात है, जो इतना गहरा है कि उसे बस खुद तक ही सीमित रखना चाहिए।

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