क्या करूँ किस से कहूँ इतना ही बेगाना है यार
सारे 'आलम में नहीं पाते किसी का आश्ना
“What should I do, whom should I tell? My friend, you are so distant, In this whole world, I cannot find anyone's assurance.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या करूँ किस से कहूँ, इतना ही बेगाना है यार। सारे आलम में नहीं पाते किसी का आसना।
विस्तार
यह शेर अकेलेपन और तन्हाई के गहरे एहसास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि दिल में इतना दर्द है कि यह किसी से कहेंगे कैसे.... कि इस पूरी दुनिया में कोई ऐसा नहीं मिलता जो दिल की बात समझ सके। यह एक बहुत ही गहरा और दिल को छू लेने वाला दर्द है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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