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ना-समझ है तो जो मेरी क़द्र नईं करता कि शोख़
कम बहुत मिलता है फिर दिल-ख़्वाह इतना आश्ना

If you are unaware, why would you not cherish me, oh charming one? / For such a beloved heart is rarely found so familiar.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर तुम मेरी कद्र नहीं करते, तो क्यों हो ऐसे नासमझ? ओ शोख़, कम मिलता है दिल-ख़्वाह इतना आश्ना।

विस्तार

यह शेर आत्म-सम्मान और अपनी कीमत समझने की बात करता है। शायर समझाते हैं कि अगर कोई आपकी शोख़ी, आपके अंदाज़ की कद्र नहीं करता, तो उसे पता होना चाहिए कि और भी बहुत से दिल-ख़्वाह हैं। यह एक बहुत ही गहरा संदेश है—कि अपनी पहचान और अपनी अहमियत को कभी कम नहीं समझना चाहिए।

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