रात मज्लिस में तिरी हम भी खड़े थे चुपके
जैसे तस्वीर लगा दे कोई दीवार के साथ
“In the night's gathering, we too stood silent, by your side, Like a painting hung against a wall, nowhere to hide.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
रात की महफ़िल में, हम भी चुपचाप तुम्हारे पास खड़े थे, जैसे कोई तस्वीर दीवार से चिपकी हो।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की खामोश तड़प को बयान करता है। शायर कहते हैं कि महफ़िल में, जब महबूब मौजूद हो, तो हम भी चुपचाप खड़े थे.... जैसे किसी दीवार पर लगी तस्वीर। इसका मतलब है कि चाहे आप महबूब के इतने करीब हों, फिर भी आपकी भावनाएं इतनी अनसुनी हैं कि आपको बस एक सजावट का सामान महसूस होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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