क्या मुआफ़िक़ हो दवा इश्क़ के बीमार के साथ
जी ही जाते नज़र आए हैं इस आज़ार के साथ
“How can one be compatible with the illness of love, To live along with this sorrow, it seems impossible.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रेम के रोग से कोई कैसे मिलान कर सकता है, इस दुख के साथ जीना असंभव लगता है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के गहरे और बे-इंतहा दर्द को बयां करता है। शायर पूछते हैं कि क्या कोई दवा इस इश्क़ के बीमार को ठीक कर सकती है? जवाब तो यह है कि यह दर्द इतना गहरा है कि ज़िंदा रहना भी एक सज़ा जैसा लगता है। यह उस दर्द को बयान करता है, जो दवा से नहीं, बल्कि वजूद से जुड़ा होता है।
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