क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़ — मीर तक़ी मीर

क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़ हक़-शनासों के हाँ ख़ुदा है इश्क़

“What truth should I speak about what love is, By the truth of the beloved, O God, is love.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं क्या कहूँ कि प्रेम क्या है, यह क्या है। प्रिय के सत्य से, हे खुदा, प्रेम है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के गहरे रहस्य को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि इश्क़ की हक़ीक़त क्या है, और जवाब देते हैं कि यह इश्क़ इतना गहरा है कि यह ख़ुदा की ही शनासा (पहचान) है। इसका मतलब है कि मोहब्बत महज़ एक एहसास नहीं, बल्कि एक दैवीय अनुभव है जो हमें हक़ से जोड़ता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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