Sukhan AI
दिल का उस कुंज-ए-लब से दे है निशाँ
बात लगती तो है ठिकाने की

From the grove of your lips, a mark on the heart is given, It seems like a promise, a certain destination.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दिल के उस कुंज-ए-लब से एक निशानी मिलती है, जो किसी ठिकाने या वादे जैसी लगती है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी उलझन को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि होंठों का निशान तो दिल पर पड़ गया है, वो सच है। लेकिन जो बातें कही जा रही हैं, वो इतनी पक्की, इतनी ठिकाने वाली लगती हैं.... कि शायर को शक हो जाता है। क्या ये वादा सच में हमेशा का है, या बस एक खूबसूरत धोखा है? यह इश्क़ की उस नाजुक दहलीज पर खड़े होने जैसा है।

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पाठ
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