करते ही नहीं तर्क-ए-बुताँ तौर-ए-जफ़ा का शायद हमीं दिखलावेंगे दीदार ख़ुदा का

“Not by performing the logic of the wild, or the manner of cruelty, Perhaps we will see the sight of God.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

करते ही नहीं, कि (बुताँ) के तर्क और (जफ़ा) के तौर पर, शायद हम ही भगवान का दीदार दिखा लेंगे।

विस्तार

यह शेर सांसारिक तर्कों और फ़िराक़ के दर्द से ऊपर उठने की बात करता है। शायर कहते हैं कि हमें बिछड़ने के तर्कों को जंगल की तरह नहीं समझना चाहिए। असली मंज़िल तो कहीं और है.... वो है ख़ुदा का दीदार! शायर का इशारा है कि हमारा ध्यान दर्द से हटकर, रूहानी सत्य की तरफ़ होना चाहिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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