रहम कुछ पैदा किया शायद कि उस बे-रहम ने
गोश उस का शब इधर ता आख़िर-ए-अफ़्साना था
“Perhaps some pity was born, that the heartless one Could not endure this life's end, the final tale.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायद कुछ रहम पैदा हुआ कि उस बे-रहम ने / गोश उस का शब इधर ता आख़िर-ए-अफ़्साना था।
विस्तार
यह शेर दया और क्रूरता के बीच के नाजुक रिश्ते को दिखाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि शायद किसी ने दया का एक छोटा सा एहसास किया, वर्ना वह बे-रहम व्यक्ति यह पूरी कहानी ही खत्म कर देता। यह दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी मेहरबानी भी किसी कठोर दिल को बदल सकती है, और दया ही है जो कहानी को मिटने से बचाती है।
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