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यही होगा क्या होगा 'मीर' ही न होंगे
जो तू होगा बे-यार ग़म-ख़्वार होगा

Will this be, or will it be? 'Mir,' you will not be; you will be a heart-sore, unloved one.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यह क्या होगा, यह क्या होगा, 'मीर' ही न होंगे, जो तू होगा बे-यार ग़म-ख़्वार होगा।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने आशिक़ की गहरी बेचैनी को बयान किया है। वो पूछ रहे हैं कि क्या होगा, क्योंकि वो महसूस करते हैं कि अगर वो महबूब से दूर हो गए, तो उनका जीवन बस ग़म से भरा रहेगा। यह सिर्फ बिछड़ने का दर्द नहीं है, बल्कि अस्तित्व का सवाल है। मीर कहते हैं कि मोहब्बत सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि ज़िन्दगी का सहारा है!

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