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उचटती मुलाक़ात कब तक रहेगी कभू तो तह-ए-दिल से भी यार होगा

How long will this meeting of the heart endure? Perhaps the beloved will be found even in the depths of the soul.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उचटती मुलाक़ात कब तक रहेगी, कभू तो तह-ए-दिल से भी यार होगा। इसका शाब्दिक अर्थ है कि यह दिल की मुलाक़ात कब तक रहेगी, शायद महबूब दिल की गहराई से भी मिल जाएगा।

विस्तार

यह शेर अस्थायी मुलाकातों की नश्वरता को बयां करता है। शायर पूछ रहे हैं कि ये मुलाकातें कब तक चलेंगी, जो एक तरह से विरह की पीड़ा है। लेकिन दूसरी लाइन में एक गहरा सुकून है: कि भले ही ये मिलन क्षणभंगुर हों, लेकिन जो इश्क़ दिल की गहराई में बसता है, वो कभी खत्म नहीं होगा। यह अस्थायी मिलन से स्थायी एहसास की ओर एक खूबसूरत सफर है।

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