बंदगी एक अपनी क्या कम है
और कुछ तुम से कहिए क्या साहब
“What lack is there in one's own devotion, Tell me, sir, what else can be said to you?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरी अपनी बंदगी में क्या कमी है, और साहब, आप मुझसे और क्या कहलवाना चाहते हैं।
विस्तार
यह शेर एक गहरे समर्पण और सवाल का संगम है। शायर कह रहे हैं कि मेरी वफ़ादारी और मेरी बंदगी अपने आप में काफी है। वो यह पूछ रहे हैं कि साहब! आप मुझसे और क्या चाहते हैं? इसमें एक अजीब सा भाव है— न पूरी तरह से हार मानना, न पूरी तरह से विद्रोह करना। बस एक सवाल है, जो अपने प्यार की गहराई को बयान करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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