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बस ऐ 'मीर' मिज़्गाँ से पोंछ आँसुओं को
तू कब तक ये मोती पिरोता रहेगा

Oh 'Mir', wipe your tears with your handkerchief, How long will you keep stringing these pearls?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

बस ऐ 'मीर', मिज़्गाँ से आँसुओं को पोंछ दे, तू कब तक ये मोती पिरोता रहेगा।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ आँसुओं की बात नहीं करता, बल्कि दिल के बोझ की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि दर्द और ग़म को संभालना, उसे मोती की तरह पिरोना... यह काम बहुत थका देने वाला है। यह एक तरह से खुद को ही समझाना है कि ऐ दोस्त! बस करो.... इस शोहरत के ग़म को अब और नहीं... अब थोड़ा सुकून चाहिए!

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