आख़िर आऊँगा ना'श पर अब आह — मीर तक़ी मीर

आख़िर आऊँगा ना'श पर अब आह कि ये आशिक़ तमाम होता है

“Finally, I will come to the gathering, oh, what a sigh, For this lover is utterly consumed.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

आखिरकार मैं महफ़िल में आऊँगा, आह, यह आशिक़ पूरी तरह से टूट चुका है।

विस्तार

यह शेर आशिक़ के उस गहरे दर्द को बयान करता है, जब प्यार की राह पर चलना भी भारी पड़ने लगता है। शायर कहते हैं कि आख़िरकार मैं नाश पर आऊँगा.... आह भरकर! क्योंकि ये इश्क़ का सफ़र... मेरे लिए अब बहुत मुश्किल हो गया है। यह सिर्फ़ शराब की बात नहीं है, यह दिल के टूटने का अहसास है जो एक सुकून की तलाश में है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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