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ज़ेर-ए-शमशीर-ए-सितम 'मीर' तड़पना कैसा
सर भी तस्लीम-ए-मोहब्बत में हिलाया न गया

What kind of agony is it, 'Meer,' under the sword of cruelty? / My head was not shaken even by the surrender to love.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

सितम की तलवार के नीचे 'मीर', तड़पना कैसा? मेरे सिर को मोहब्बत के आगे झुकने से भी नहीं हिलाया गया।

विस्तार

यह शेर आशिक़ की गहरी उलझन और दर्द को बयां करता है। मीर तक़ी मीर पूछते हैं कि यह कैसा तड़पना है, जो सितम की तलवार के नीचे हो। लेकिन दूसरी पंक्ति में वो बताते हैं कि जब दिल ने मोहब्बत के आगे सर झुका दिया, तब भी उसका सिर नहीं हिला। इसका मतलब है कि इश्क़ का दर्द किसी बाहरी ज़ुल्म से कहीं ज़्यादा गहरा और असहनीय होता है।

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