'मीर' अब बहार आई सहरा में चल जुनूँ कर — मीर तक़ी मीर

'मीर' अब बहार आई सहरा में चल जुनूँ कर कोई भी फ़स्ल-ए-गुल में नादान घर रहे है

“Mir (the poet) now that spring has arrived in the desert, let's roam in madness, No innocent household remains in the garden of flowers.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर कहते हैं कि अब बहार आ गई है रेगिस्तान में, चलो पागलपन में घूमते हैं, क्योंकि फूलों के बाग में कोई भोला घर नहीं बचा है।

विस्तार

यह शेर जीवन की उस सच्चाई को बयां करता है, जहाँ ख़ुशी और मस्ती का आगमन होता है। मीर साहब कहते हैं कि जब रेगिस्तान में भी बहार आती है, तो जुनून के साथ जीना चाहिए। दूसरी लाइन एक चेतावनी है—फूलों के मौसम में कोई भी भोला-भाला या नादान इंसान टिक नहीं पाता। यह एक ज़िंदादिल और साहसी जीवन जीने का नज़रिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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