मत दश्त-ए-मोहब्बत में क़दम रख कि ख़िज़र को
हर गाम पे इस रह में सफ़र से हज़र आवे
“Do not set foot in the desert of love, for Khizr will appear At every step on this path, from the journey's embrace.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मोहब्बत के रेगिस्तान में कदम मत रखना, नहीं तो ख़िज़र हर कदम पर इस रास्ते में सफ़र से प्रकट हो जाएँगे।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत के सफर की गहराई को समझाता है। शायर कहते हैं कि इश्क़ का रास्ता कोई आम रास्ता नहीं है; यह एक आध्यात्मिक रेगिस्तान है। इसीलिए वो चेतावनी देते हैं कि इस पर कदम संभालकर रखें, क्योंकि इस राह के हर कदम पर कोई न कोई हज़रत, कोई न कोई सच्चाई सामने आ जाएगी। यह बताता है कि मोहब्बत का सफर कितना गहरा और दिव्य होता है।
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