लग कर तदर्रो रह गए दीवार-ए-बाग़ से — मीर तक़ी मीर
लग कर तदर्रो रह गए दीवार-ए-बाग़ से
रफ़्तार की जो तेरी सबा ने चलाई बात
“Leaning against the wall of the garden, I stood still, When your breeze initiated the conversation of speed.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दीवार-ए-बाग़ से टेक लगाकर मैं खड़ा रह गया, जब तुम्हारी तेज़ हवा ने गति की बात शुरू की।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस नज़दीकी एहसास को बयां करता है, जब महबूब की यादें हवा में घुल जाती हैं। शायर कह रहे हैं कि बस दीवार से तड़तड़ा कर खड़े रहना ही काफी था... कि हवा ने खुद ही कोई बात कह दी। मतलब, महबूब का असर इतना गहरा है कि प्रकृति भी उसके बारे में बातें करने लगती है। क्या ख़ूब नज़ारा है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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