ख़त लिखते लिखते 'मीर' ने दफ़्तर किए रवाँ — मीर तक़ी मीर

ख़त लिखते लिखते 'मीर' ने दफ़्तर किए रवाँ इफ़रात-ए-इश्तियाक़ ने आख़िर बढ़ाई बात

“As 'Mir' wrote letters, his mind was in a state of flow, Excessive yearning finally made his words overflow.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

पत्र लिखते-लिखते 'मीर' के दफ़्तर (या विचारों) में प्रवाह आ गया। अत्यधिक चाहत ने आखिरकार बात को बढ़ा दिया।

विस्तार

मीर तक़ी मीर ने यहाँ इश्क़ की उस बे-क़बू ताक़त को बयां किया है, जो इंसान को हर काम से भटका देती है। वह कहते हैं कि ख़त लिखते-लिखते ही उन्होंने अपना दफ़्तर छोड़ दिया। क्यों? क्योंकि उनकी शिद्दत-ए-इश्क़ ने आख़िर एक ऐसी हद पार कर दी कि दुनिया की कोई भी ज़िम्मेदारी उन्हें दिखाई नहीं दी।

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