उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झुमके है सब में नूर — मीर तक़ी मीर

उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झुमके है सब में नूर शम-ए-हरम हो या कि दिया सोमनात का

“From the glory of her beauty, every sparkle shines with light, Be it the lamp of the holy precincts, or the oil lamp of Somnath.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उसकी सुंदरता की आभा से हर जगह चमक है, चाहे वह हरम का दीपक हो या सोमनाथ का तेल का दीया।

विस्तार

यह शेर बताता है कि खूबसूरती का असर कितना गहरा होता है। शायर कहते हैं कि जो नूर (रोशनी) हम दुनिया की हर पवित्र जगह पर देखते हैं—चाहे वह काबा हो या सोमनाथ का दिया—वो सब एक ही जगह से आता है। वो स्रोत है महबूब की खूबसूरती का फ़रोक़़। यह महज़ तारीफ़ नहीं है, बल्कि एक एहसास है कि हुस्न में इबादत और रौशनी दोनों समाए हुए हैं।

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