क़सम जो खाइए तो ताला-ए-ज़ुलेख़ा की अज़ीज़-ए-मिस्र का भी साहब इक ग़ुलाम लिया

“If swear you must, swear by the fortune of Zulaikha— / Sir, she claimed as her prize even the slave of Egypt's lord.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर क़सम खानी ही हो तो ज़ुलैख़ा की क़िस्मत की खाइए, जिसने मिस्र के हाकिम (अज़ीज़) के ग़ुलाम को भी अपना बना लिया।

विस्तार

शायर यहाँ बड़े चुटीले और प्यार भरे अंदाज़ में ज़ुलेख़ा की तक़दीर की तारीफ़ कर रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर क़सम ही खानी हो तो ज़ुलेख़ा के नसीब की खाइए, जिसे अज़ीज़-ए-मिस्र का ग़ुलाम मिला—लेकिन वह मामूली ग़ुलाम नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे हसीन यूसुफ़ थे। यह शेर इश्क की उस ज़बरदस्त क़िस्मत को बयां करता है जहाँ ज़ाहिरी तौर पर जो सिर्फ़ एक ग़ुलाम था, असल में वही दिल और दुनिया का बादशाह निकला।

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